Wednesday, April 28, 2010

अवांछित


वो कहते हैं
जिदंगी कठिन है
गरल-की तरह
इसे जीने के लिए
पीना जरूरी है..
और कई बार..
यह भी कि-
जीते जाएं, इसलिए 
बिकना मजबूरी है
बिकने के लिए- 
वेश्या होना जरूरी है
मैं सोचता हूं-
क्या जिंदगी वाकई ऐसी है
पीना, बिकना और वेश्या होना
यदि जिंदगी की मजबूरी है
तो मेरे दोस्त-
तुम कहो
ऐसी जिंदगी जीना
क्योंकर जरूरी है।।

2 comments:

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

वो कहते हैं
जिदंगी कठिन है
गरल-की तरह
इसे जीने के लिए
पीना जरूरी है..


मन की गहराई से निकले शब्द....रचना अच्छी लगी..

संजय भास्‍कर said...

सुन्दर भावों को बखूबी शब्द जिस खूबसूरती से तराशा है। काबिले तारीफ है।