उनका होना
मेरा होना
उनके होने-
में सब होना
जीवन था
कुछ और
न होना
अहक हृदय की
मन का कोना
पोर-पोर का
फटकर रोना
अब लगता है
उन बिन होना
न कुछ होना
कुछ न होना।।
Sunday, February 14, 2010
Saturday, February 13, 2010
Tuesday, February 9, 2010
Tuesday, February 2, 2010
स्वप्न और जिंदगी
Saturday, January 30, 2010
दर्द
कठिन नहीं होता
चुप-सी चीख
पी जाना
पत्थर-सा
दर्द सह जाना
सच कहता हूं
कभी नहीं खलता
रक्त के बहाने
हृदय का बह जाना
तकलीफ
तब होती है
जब
कोई आंख मूंद
होंठ सी-कर
हंसता है
किसी की
पीड़ा पर
पीसता है नमक
गहरे घाव पर
थोड़े-भर
स्वाद के लिए
और,
नमकीन मिजाज के लिए।।
चुप-सी चीख
पी जाना
पत्थर-सा
दर्द सह जाना
सच कहता हूं
कभी नहीं खलता
रक्त के बहाने
हृदय का बह जाना
तकलीफ
तब होती है
जब
कोई आंख मूंद
होंठ सी-कर
हंसता है
किसी की
पीड़ा पर
पीसता है नमक
गहरे घाव पर
थोड़े-भर
स्वाद के लिए
और,
नमकीन मिजाज के लिए।।
Friday, January 29, 2010
प्रिये!
क्षणिका-9
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